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कुछ कहने आज मैं बैठा हूँ... - Poetry | Himanshu Dhiraj Mishra (himstar)

कुछ कहने आज मैं बैठा हूँ... - Poetry | Himanshu Dhiraj Mishra (himstar) | Touchtalent
Title : कुछ कहने आज मैं बैठा हूँ...
Artist Name: Himanshu Dhiraj Mishra (himstar)
Category : Poetry
Creation date : 17 July, 2015
Page Views : 71
Rating : 1
Description : कुछ सपने सजाये बैठा हूँ अरमान जगाये बैठा हूँ,दिल टूटा है माना मैंने दिल को समझाए बैठा हूँ,कुछ भूल गया कुछ याद किये वादों को निभाने बैठा हूँ, कुछ करने की उम्मीद लिए दिन रात लगाये बैठा हूँ,वो बचपन की यादें मेरी मंदिर और मस्जिद की गलियां,वो शाम-ए-बनारस की अपनी भोली यारी भी भुलाये बैठा हूँ ,कुछ उलझा हू कुछ सुलझा हू ये तुम और हम ही समझते हैं, कल भीड़ भरी दुनिया में था तन्हा मैं यहाँ अब बैठा हूँ,लो आखिरी बात मै करता हूँ हो सके जरा तो समझ लेना,गर थके हुए हो उठ जाओ मै जोश जगाने बैठा हू,क्यों आये हो क्या करना है या यूं ही जीना फिर मारना हैं,कुदरत की चाहत हमसे है क्या ये तुम्हे बताने बैठा हू,यूं जीना मुझको रास नहीं की मर के मैं भीड़ में खो जाऊं, हो कफ़न तिरंगे में लिपटा यूं तैयार सिपाही बैठा हूँ.---- !diot, !nitiate,.. :)- Himanshu Dhiraj Mishra