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कोई नाराज़ हुए बैठा है... - Poetry | Himanshu Dhiraj Mishra (himstar)

कोई नाराज़ हुए बैठा है... - Poetry | Himanshu Dhiraj Mishra (himstar) | Touchtalent
Title : कोई नाराज़ हुए बैठा है...
Artist Name: Himanshu Dhiraj Mishra (himstar)
Category : Poetry
Creation date : 22 January, 2015
Page Views : 59
Comments : 6
Rating : 2
Description : हमदर्द मेरे दिल का नाराज़ हुए बैठा हैआँखों में गुस्सा सितम हज़ार लिए बैठा है,कह दो कोई ये इनायत उस पर नहीं जंचती मासूम से चेहरे पर क्यों इंकार लिए बैठा है.उसकी हंसी से कोई खुशियों से भर जाता हैक्यों वो नज़रों में तीर तैयार लिए बैठा है,खतायें मोहब्बत में हो जाती हैं अक्सरसब्र नहीं होता आशिक़ी में जो दीदार लिए बैठा है,कुदरत की खिलाफत होती है कभी कभीहर गलतियां माने कोई बेक़रार हुए बैठा है,कुछ बात होती है तभी मिलते हैं दो दिलयूं ही नहीं दिल में कोई सच्चा प्यार लिए बैठा है,वो दुनिया नहीं मिलती मोहब्बत में फिरखुदा भी बस सबके लिए एक दिल तैयार लिए बैठा है,उसकी ही इनायत होती है मोहब्बत क्यों ऐसा कर रहे दो दिल खुद को हैरान लिए बैठा है,किसी की खुशियों की खातिर आज कोईहोठ बंद किये दिल उदास लिए बैठा है,पढ़कर इसे अगर सूली पे चढ़ा दे दिलबर तो क्या कोई सर झुकाये फंदे तैयार लिए बैठा है,काले श्याम की दीवानी थी राधा सब जानते हैंइसलिए कोई उसकी बंसी उधार लिए बैठा है,उसका हमसफ़र हंस के भुला देगा सारी खताकोई इस उम्मीद में चन्द सांसे उधार लिए बैठा है..---------- !diot (Himanshu)....