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फिर भी.... बात करते हैं...
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रोज़ लुटती है बहु, बेटी अपने ही रिश्तेदारों से
और हम नारी सुरक्षा की बात करते हैं,
घुस आते हैं दुश्मन दरवाजे तक हम सोते रह जाते हैं
और civilians में Army officer होने की धाक करते हैं,
रोज़ लुटती है बहु, बेटी अपने ही रिश्तेदारों से
और हम नारी सुरक्षा की बात करते हैं,
घुस आते हैं दुश्मन दरवाजे तक हम सोते रह जाते हैं
और civilians में Army officer होने की धाक करते हैं,
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#Poetry
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बता तो मेरी जा...
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तूने ही मुझको हंसाया मेरी जा
तूने ही मुझको रुलाया,
तूने ही उल्फत की राहें दिखाई
तूने ही ठोकर लगाया ,
सच्चे लगते थे तुमको हमेशा
तो भी सितम तुमने ढाया,
वादों और कस्म -->
तूने ही मुझको हंसाया मेरी जा
तूने ही मुझको रुलाया,
तूने ही उल्फत की राहें दिखाई
तूने ही ठोकर लगाया ,
सच्चे लगते थे तुमको हमेशा
तो भी सितम तुमने ढाया,
वादों और कस्म -->
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